मध्यप्रदेश में टला पंचायत चुनाव लड़ाकुओं के हौसले हुए पस्त

मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव टला किसका श्राप है चुनाव टलना
राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने तो संसद में केवल भाजपा सांसदों को ही श्राप दिया था लेकिन मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव किसके श्राप से शापित हो गये हैं। यह खोज का विषय है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को देर शाम अंततः चुनाव निरस्त करने का फरमान जारी कर दिया। इस चुनाव में भाग्य आजमा रहे हजारों लोगों के न केवल अरमां आंसुओं में बह गए, बल्कि करोड़ों रुपए अरमानों की भेंट चढ़ गए। अब छह महीने के पहले तक चुनाव संभव नहीं हैं। चुनाव की जब अगली तारीख तय की जाएगी, तब तक चुनाव का भूगोल काफी बदल चुका होगा। चार दिसंबर को आनन फानन में चुनाव की घोषणा की गई थी। संभवतः चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका है जब चुनाव का आरंभ और अंत फुटबॉल की तरह खेला गया है। इसमें राज्य सरकार, विधानसभा, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सभी की भूमिका अहम रही।
चुनाव में खड़े उम्मीदवार उसी प्रकार ठोल खाते नजर आए, जैसा कि एक फिल्मी गीत के बोल हैं- घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं, कभी इस पग में कभी उस में बंधता ही रहा हूं मैं।
चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे लोगों ने गांव की तस्वीर बदलने की खातिर लाखों रुपए दांव पर लगा दिए। कहीं मंदिर के नाम पर तो कहीं किसी और काम के लिए। बहुत से दबंग लोग तो निर्विरोध निर्वाचित हो गये या अपने चहेतों को निर्वाचित करवा दिया। उनकी सारी मेहनत और रकम पानी में डूब गई। चुनाव सामग्री छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस की दुकानें दुल्हन की तरह सज गई थीं। बिहार और गोरखपुर आदि स्थानों से अनेक लोगों ने चुनाव सामग्री की प्रिंटिंग के लिए आधुनिक मशीनों सहित यहां अपना डेरा डाल रखा था। उनकी भी रकम फंस कर रह गई।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों ने जो बीज बोए हैं, इसका असर लम्बे समय तक प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करेगा। आमतौर पर एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद अदालत का दखल नहीं होता है। लेकिन याचिकाकर्ताओं को कुछ न कुछ बहाना मिल ही जाता है। तहलका न्यूज़ के लिए मिट्ठू शाह की रिपोर्ट TAHALKANEWS OFFICE CON NO 9198041777

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