बिहार/सीतामढ़ी:कालाजार प्रभावित 20 गांव के 27683 घरों में छिड़काव जारी

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कालाजार प्रभावित 20 गांव के 27683 घरों में छिड़काव जारी

– कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह, जन-जागरूकता से हराया जा सकता इसे

सीतामढ़ी, 2 जुलाई। कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को जिले में वर्ष 2018 में ही प्राप्त कर लिया गया और अब जिले में शून्य कालाजार के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। इसी के तहत अभी जिले में सिंथेटिक पायरोथायराइड छिड़काव कार्य चल रहा है। जिला भीबीडी नियंत्रण पदधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि विभागीय निर्देशानुसार जिले के अति प्रभावित सुरसंड, बाजपट्टी, डुमरा, नानपुर, बोखरा, रुन्नीसैदपुर, रीगा एवं सुप्पी प्रखंड के 20 कालाजार प्रभावित गांव के 27683 घरों में छिड़काव किया जा रहा है। इसके लिए कार्य योजना तैयार की गई है। कार्य योजना के अनुसार 39 दलों द्वारा 15 जुलाई तक छिड़काव कार्य पूरा किया जाएगा।

जमीन से 6 फीट की ऊंचाई तक छिड़काव, कर्मियों को मास्क-ग्लब्स उपलब्ध कराया गया-

जिला भीबीडी नियंत्रण पदधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि छिड़काव कर्मियों को घर तथा गौशाला में जमीन से 6 फीट की ऊंचाई तक छिड़काव का निर्देश दिया गया है। साथ ही सभी संबंधित क्षेत्र की आशा को छिड़काव के एक दिन पूर्व गृहस्वामी को छिड़काव कि जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य आदि प्रतिनिधियों से संपर्क स्थापित कर शत प्रतिशत छिड़काव किया जा रहा। कोरोना के मद्देनजर छिड़काव कर्मियों को मास्क और ग्लब्स उपलब्ध कराया गया है। छिड़काव में लगे सभी दलों को दो गज की शारीरिक दूरी का पालन का निर्देश दिया गया है।

समाज के लिए काली स्याह की तरह है कालाजार-

डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह है। इस बीमारी को जन-जागरूकता व सामूहिक सहभागिता से ही हराया जा सकता है। कालाजार तीन तरह के होते हैं। जो वीएल कालाजार, वीएल प्लस एचआईवी और पीकेडीएल है। कालाजार रोग लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी काटने से फैलता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है।

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