लालू यादव को बेल दिलाने को कपिल सिब्बल ने रखी ऐसी दलील, CBI के वकील चारो खाने हो गए चित

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को दुमका, चाईबासा और देवघर कोषागार से करीब 1,000 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकालने के मामले में दोषी ठहराया गया है और रांची में विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें पहले ही चाईबासा में दर्ज दो और देवघर में एक मामले में जमानत दे दी थी।

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कपिल सिब्बल और लालू यादव।
रांची
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जल्द ही जेल से बाहर आ सकते हैं। बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। यह मामला दुमका कोषागार से 3.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने शनिवार को सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता को जमानत दे दी।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को दुमका, चाईबासा और देवघर कोषागार से करीब 1,000 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकालने के मामले में दोषी ठहराया गया है और रांची में विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें पहले ही चाईबासा में दर्ज दो और देवघर में एक मामले में जमानत दे दी थी। दुमका कोषागार मामले में जमानत मिलने के बाद, उन्हें जल्द ही जेल से रिहा किए जाने की संभावना है।

लालू की बेल रोकने के लिए CBI ने रखी ये दलील
लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्होंने अपनी आधी सजा काट ली है। साथ ही उनकी उम्र काफी हो गई है और उन्हें गंभीर बिमारियों ने भी ग्रसित कर लिया है इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। इस मामले में आधी सजा पूरी करने वाले बाकी के दोषियों को जमानत मिल चुकी है। इसपर सीबीआई के वकील ने दलील दी कि चारा घोटाला के दुकमा कोषागार मामले में लालू यादव की जमानत याचिका का कोई सवाल नहीं बनता है। लालू यादव को 14 साल की सजा सुनाई गई है। सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने दो अलग धाराओं में लालू को 7-7 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि एक सजा पूरी होते ही दूसरी सजा शुरू हो जाएगी।

कपिल सिब्बल ने यूं किया CBI को चित
रांची हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव के वकील ने कपिल सिब्बल और देवर्षि मंडल ने कहा कि लालू प्रसाद ने इस मामले में छह अप्रैल को सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है, क्योंकि कोर्ट ने 19 फरवरी को माना था कि लालू प्रसाद की आधी सजा पूरी करने में एक माह 17 दिन कम है। वहीं सीबीआई का यह कहना कि लालू प्रसाद को 14 साल की सजा मिली है। यह मुद्दा जमानत पर सुनवाई के दौरान नहीं, बल्कि अपील पर सुनवाई के दौरान उठाया जाना चाहिए। अदालत किसी भी समय जमानत प्रदान कर सकती है, जैसा कि आरसी-20 में सुप्रीम कोर्ट ने लालू को जमानत दी है, लेकिन चारा घोटाला से संबंधित सभी मामलों में हाईकोर्ट ने आधी सजा पर बेल देने का मानक तय किया है। इसी आधार पर लालू ने भी जमानत देने की गुहार लगाई है। इसलिए आरजेडी सुप्रीमो को जमानत मिलनी चाहिए। कपिल सिब्बल की दलील को मानते हुए जज साहब ने लालू यादव की जमानत को मंजूरी दे दी।

लालू को मिली जमानत की खुशी में आरजेडी कार्यकर्ता ने भैंस को खिलाई मिठाई बताते चलें कि 1991 से 1996 के दौरान, बिहार सरकार के पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने कथित तौर पर दुमका, चाईबासा और देवघर से पैसे निकाले थे। उस समय यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। वर्तमान में 72 वर्षीय यादव एम्स दिल्ली में अपना इलाज करा रहे हैं। उन्होंने पहले ही 42 महीने की जेल की अवधि पूरी कर ली है। वह कथित तौर पर गुर्दे में गंभीर संक्रमण और फेफड़े में पानी के साथ 16 बीमारियों से पीड़ित हैं। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव को इस वर्ष 23 जनवरी को बेहतर उपचार के लिए दिल्ली स्थानांतरित करने की अनुमति दी थी। जमानत के बाद, पार्टी ने एक बयान जारी किया, जिसमें अदालत को धन्यवाद दिया गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने समर्थकों से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उनकी जमानत का जश्न मनाने की अपील की है।

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