उन्नाव इस समय जहां लोग कोरोना जैसी महामारी से लोग जूझ रहे हैं इसी बीच डॉक्टर सुरभि का यह गीत लोगों को आत्म बल प्रदान करता है

उन्नाव । इस समय जहाँ कोरोना जैसी महामारी से लोग जूझ रहे है लोग एक जगह रहकर घुटन व डर महसूस कर रहे है वही कोरोना के भयावह रुप से लड़ने की ताकत आत्मसम्बल प्रदान कर रहा है डॉ सुमन सुरभि का गीत
इस अंधेरी रैन में दीपक जलाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटाकर मुस्कुराना ही पड़ेगा
बहुत ही सराहा जा रहा है
डॉ सुमन का यह गीत देश ही नही न्यूयॉर्क के हिंदी समाचार पत्रं ने भी प्रकाशित लोगो मे आत्मबल पैदा करने का कार्य किया

गीत,

इस अंधेरी रैन में दीपक जलाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटा कर मुस्कुराना ही पड़ेगा ।

काल का व्यापा कहर है
क्षीण जीवन की लहर है
है सशंकित हर ह्रदय
यह रात का अंतिम प्रहर है
आस के सूरज को मानस में उगाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटा कर मुस्कुराना ही पड़ेगा ।

है अपेक्षित धैर्य रखना
अपनी हिम्मत को परखना
राह है दुर्गम बहुत पर
साथ है संकल्प अपना
मृत्यु के आतंक को मन से मिटाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटा कर मुस्कुराना ही पड़ेगा ।

बुलबुले सा है ये जीवन
क्यों सहेजें बैरअनबन
भाव कटुता का भुलाकर
बांध लें बस नेह बंधन
जो है अंतिम सत्य उससे तो निभाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटा कर मुस्कुराना ही पड़ेगा ।

सार जीवन का, खुशी है
किस लिए फिर अनमनी है
जिसपे अपना वश नहीं है
उससे फिर क्यों दुश्मनी है
श्वास के सुमनो को सौरभ तो लुटाना ही पड़ेगा
पीर की चादर हटाकर मुस्कुराना ही पड़ेगा।

– डाॅ. सुमन ‘सुरभि’

  • तहलका न्यूज ब्युरो प्रमोद सिंह की रिपोर्ट

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