यूपी के उन्नाव जिले में एक ऐसी जगह है जहां हिन्दू मुस्लिम एक साथ पूजन करते हैं ये जगह हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है

तहलका न्यूज़ के लिए विशेष संवाददाता राकेश बाजपेई की रिपोर्ट
  • पी उन्नाव जनपद में एक जगह ऐसी भी है जहां हिंदू-मुसलमान एक साथ पूजन करते है।गांव में दोनों समुदाय के लोग वर्ष मेंअसाढ़ की पूर्णिमा के दिन एक ही देवी की पूजा करते हैं।आषाढ़ पूर्णिमा के दिन यहाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की शानदार मिसाल देखने को मिलती है।

उन्नाव जनपद के फतेहपुर चौरासी विकास खण्ड की ग्राम पंचायत कठिघरा में गत वर्षों की भाति इस वर्ष भी बड़ी धूमधाम के साथ असाढ़ी की पूजा अर्चना की गयी।गांव में होने वाली पूजा आसपास के क्षेत्रों के लिए मिशाल बनी है।आपको बता दें यहा असाढ मास की पूर्णिमा को होने वाली पूजा आज से लगभग सैकड़ों साल से पारम्परिक रुप से होती चली आ रही है।जिसे वर्तमान ग्राम प्रधान दीपक यादव के बाबा द्वारा शुरु कराई गयी थी।जिसको करनें के लिए कई दिनों पहले से इन्तजामात शुरू करनें के साथ ही हजारों रुपये पूजा में लगते हैं।
पूजा में गांव के प्रति घर की होती हैं सहभागिता यूं तो गांव में उक्त पूजा को करानें के लिए कई सम्पन्न परिवार हैं।लेकिन इस पूजा को सभी ग्रामीण मिल जुलकर कराते हैं इसीलिए प्रति घर श्रद्धानुसार चन्दा स्वरुप पैसे देकर अपनी हाजिरी लगाते हैं।तथा कुछ लोग पैसों के स्थान पर पूजा में लगने वाला घी देते हैं।वहीं एक शर्मा परिवार पूजा के लिए रथ तैयार करके ले जाते हैं।छैया,मेढ़ा,मुर्गा,हवन सामग्री, झण्डा,प्रसाद,आदि सामग्री लगती है।
गांव में स्थापित मन्दिरों में भी होती है पूजा बाहरी आपदाओं से बचने के लिए गांव में स्थापित प्रत्येक मन्दिरों में जाकर पुजारी जी द्वारा वैदिक मन्त्रों का जाप कराकर किसी भी बाहरी आपदाओं से बचानें के लिए विनती की जाती है।
यू तों हरदेव बाबा की पूजा कब से प्रारम्भ हुई इस विषय में किसी भी ग्रामीण को कोई जानकारी नहीं है लेकिन बुजुर्गों की मानें तो इस पूजा की शुरुआत स्व० सुबेदार सिंह यादव के पूर्वजों नें जब गांव की स्थापना हुई थी तब से प्रारम्भ हुई थी।लेकिन इस विषय में कोई निश्चित साल की जानकारी नहीं है।
एक वर्ष नही हो पाई थी पूजा
बुजुर्गों की मानें तो बहुत साल पहले किसी बात को लेकर बरदेव बाबा(असाढी़)की पूजा नहीं हो पायी।जिसके पश्चात ही गांव में काफी संख्या में लोगों की मौते हो गयी।आलम ये हुआ कि लोग एक व्यक्ति का अन्तिम संस्कार करके वापस आ नहीं पा रहे थे कि तब तक कई लोगो की मौत हो जाती थी।जिसके पश्चात हरदेव बाबा नें स्वप्न देकर पुन: पूजा देने के लिए कहा।तब से लेकर आज तक प्रत्येक साल पूजा होती चली आ रही है।

तहलका न्यूज से विशेष संवाददाता रकेश बाजपेई की रिपोर्ट,

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