बलरामपुर जिले का तुलसीपुर तहसील प्रशासन माननीय न्यायालय के आदेशों का पालन कराने में नाकाम नारी सशक्तिकरण के दावे साबित हुए हवा हवाई

ये हैं गैंसडी के पूर्व विधायक हाजी अलाउद्दीन खां के बड़े भाई हाजी सलाहुद्दीन

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माननीय न्यायालय के आदेशों के पालन कराने में नाकाम स्थानीय प्रशासन नारी शक्तिकर्ण के दावे साबित हुए हवाहवाई पीड़ित महिला पक्ष में आदेश होनेपर भी नही मिला न्याय। प्रदेश में एक तरफ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के दावे तो भाजापा सरकार करती है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग ही दिखाई दे रहा है ।सत्ता पक्ष का हनक दिखा कर सत्ता पक्ष के लोग निर्बल और गरीबो की जमीन पर दबंगो का कब्जा अब आम सी बात हो चुकी है ।ऐसा ही कुछ मामला जनपद बलरामपुर के तुलसीपुर तहसील क्षेत्र का प्रकाश में आया है जिसमे पीड़िता को न्याय मिलता नही दिख रहा है ।और वह दरबदर की ठोकरे खाने को मजबूर है और उसकी सुनवाई जब कहीं नही हुई तो वह माननीय जिला न्यायालय की शरण मे जा पहुची और उसके पक्ष में आदेश होने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों पर राजनीतिक और सत्ता के दबाव के चलते अनुपालन नही करवाया जा रहा इस प्रकरण में समाज सेवी और पूर्व विधायक बसपा के भाई ने बताया कि उक्त पीड़ित महिला मेरे पास सहायता के लिये आ चुकी है और उसके अनुसार प्रकरण इस प्रकार है यह भूमि भीखी पासवान ग्राम लक्षमण पुर रमवापुर का है जिसमे जमीन 36 बीघा है और उसकी म्रत के बाद उसके पोते राजेन्द्र कुमार के माध्यम से यह जमीन हारून पुत्र रफीक उर्फ देबा एव अब्दुल्ला ,बादुल्ला पुत्र हारून को19 बीघा जमीन खेती के वास्ते बटाई दिया गया था ।उसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उसका लापता होने के बाद उसके जमीन का वारिस उसकी पत्नी शीला देवी हो गई ।भरण पोषण के कारण शीला देवी ने उस जमीन का 16 बीघा जमीन गीता देवी पत्नी गणेश व घिर्री देवी पत्नी पलटू राम निवासी कटिया भारी तहसील तुलसीपुर को 2017 में बेच रजिस्ट्री बैनामा कर दिया और बची हुई जमीन में बनी दुकान व बाबत जमीन विक्की सिंह ने बैनामा लेलिया उसके बाद दूसरे दिन इस प्रकरण में खेल आरम्भ हुआ ।दूसरे दिन कल्लू धोबी पुत्र लखन निवासी चोरघटिया के नाम शीला देवी को बरगला कर सवा तीन बीघा जमीन कूट रचित ढंग से कल्लू धोबी के नाम बैनामा करवा लिया गया ।जिसकी जानकारी पीड़ता को काफी दिन बाद मिल सकी की कल्लू धोबी ने जमीन धोके से लिखा लिया।चूंकि पीड़िता अनपढ़ है । रोजी रोटी की समस्या उतपन्न होने पर पीड़ता ने इस प्रकरण में पीड़ता ने अधिकारियों से फरियाद किया जब कोई समाधान नही हुआ तब न्यायालय की शरण मे जा कर न्याय की गोहार लगाई जिसमे जिला न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर और पीड़ता के पक्ष में स्थगन आदेश करते हुए गीता देवी के पक्ष में कर पुनः जोतने बोन और खेती करने अथवा पीड़ता के पक्ष में जमीन वापस वापसी का आदेश दिया परन्तु क्षेत्रीय सफेद पोशों के कारण पीड़ता की जमीन नही मिल पा रहा जिससे सत्ता पक्ष का राजनीतिक वर्चश्व हावी देखा जारहा इसी कारण सूत्रों की माने तो सम्बन्धित अधिकारी भी मौन धारण किये हुए है ।जिससे पीडिताके सामने जमीन खोने और रोजी रोटी की समस्या उतपन्न हो रही ऐसे में योगी सरकार का यह दावा नारी सुरक्षा और सम्मान अब सिर जुमला बन कर रह गया है. तहलका न्यूज़ के लिए राजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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