आईडीए-एमडीए अभियान में 92% कवरेज, अब ‘मॉप-अप’ राउंड से छूटे हुए लोगों पर वार

आईडीए-एमडीए अभियान में 92% कवरेज, अब ‘मॉप-अप’ राउंड से छूटे हुए लोगों पर वार

​वैशाली। 12 मार्च
​वैशाली जिले को फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी ताकत झोंक रहा है। 10 फरवरी से शुरू हुए ट्रिपल ड्रग थेरेपी (आईडीए) – मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान ने जिले में उल्लेखनीय प्रगति की है। आईएचआईपी पोर्टल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिले ने अब तक औसतन 92% कवरेज हासिल कर ली है।

​सर्वेक्षण के अंतर को पाटने के लिए ‘मॉप-अप’ दौर:
​हालांकि पोर्टल पर कवरेज 92% है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के उपभोग सर्वेक्षण में यह औसत 60% पाया गया है। आंकड़ों के इस अंतर को खत्म करने और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रशासन ने 5 मार्च से 13 मार्च तक विशेष ‘मॉप-अप’ दौर शुरू किया है। इसमें उन घरों और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जहाँ लोगों ने दवा लेने में हिचकिचाहट दिखाई थी या जो नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) के दौरान चिह्नित किए गए थे।

​इन क्षेत्रों पर विशेष नजर:
​जिला स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से उन प्रखंडों और गांवों पर केंद्रित है जहाँ खपत दर कम रही है। मुख्य रूप से महुआ ब्लॉक के रामपुर चंदन, सिंघारा, कौनौली धरज, पहाड़पुर और नगर पंचायत क्षेत्र के साथ-साथ चेहराकलां ब्लॉक के तेलौर, सलेमपुर डुमरिया, बेगम पट्टी और सुमेरगंज जैसे क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

​घर-घर दस्तक और ओपीडी काउंसलिंग:
​ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर और सुपरवाइजर न केवल घर-घर जाकर दवा खिला रहे हैं, बल्कि कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) भी क्षेत्र में जागरूकता फैला रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले हर मरीज की काउंसलिंग की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी व्यक्ति सुरक्षा कवच से बाहर न रहे। जिला वेक्टर बोर्न नियंत्रण पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने कहा कि ​”यह अभियान टीम वर्क का परिणाम है। हम उन लोगों की हिचकिचाहट दूर कर रहे हैं जिन्होंने अब तक दवा नहीं ली है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और फील्ड विजिट के जरिए हर दिन की प्रगति की मॉनिटरिंग की जा रही है।”

​वलेही टीम ने ली शपथ:
​अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए वलेही टीम के सदस्यों ने खुद दवा खाकर और समाज को जागरूक करने की शपथ लेकर एक मिसाल पेश की है। प्रशासन ने अपील की है कि फाइलेरिया से बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है, इसलिए सभी नागरिक स्वास्थ्य कर्मियों के सामने दवा का सेवन अवश्य करें।

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