भारतीय बहुजन एलायंस की बैठक में बिहार के प्रसिद्ध मुस्लिम समाजसेवी का अपमान — बहुजन आंदोलन की साख पर गंभीर सवाल

भारतीय बहुजन एलायंस की बैठक में बिहार के प्रसिद्ध मुस्लिम समाजसेवी का अपमान — बहुजन आंदोलन की साख पर गंभीर सवाल
रिपोर्ट:नसीम रब्बानी
दिल्ली स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित बहुजन-मुस्लिम एकता सम्मेलन के दौरान बिहार के प्रसिद्ध मुस्लिम समाजसेवी, लेखक और सामाजिक चिंतक को सार्वजनिक रूप से मंच पर बोलने से रोका गया। इस कार्यक्रम में मंच पर सांसद स्वामी प्रसाद मौर्य, INL के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान, वरिष्ठ बहुजन नेता सुरेश माने और कई अन्य नेताओं की उपस्थिति में यह घटना घटी।

यह घटना तब हुई जब बिहार के सम्मानित समाजसेवी ने पसमांदा समाज की जमीनी समस्याओं पर बोलने की अनुमति मांगी, जिसमें अनुच्छेद 341/3 को समाप्त करने, जातिगत आरक्षण में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और पसमांदा मुस्लिम समाज को सशक्त प्रतिनिधित्व देने की माँगें थीं।

उन्हें मंच पर बोलने से सीधे मना कर दिया गया और अपमानजनक व्यवहार किया गया। यह घटना पसमांदा समाज के प्रति मौजूद अशराफ मानसिकता और बहुजन एकता के खोखले नारों की असलियत को उजागर करती है।

इरफान जामियावाला का कहना है की”जब पसमांदा समाज के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए एक समाजसेवी आवाज़ उठाता है और उसे अपमानित कर मंच से खारिज कर दिया जाता है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे पसमांदा समाज का अपमान है। बहुजन आंदोलन तब तक अधूरा है जब तक उसमें बहुजन मुस्लिम समाज की समान भागीदारी नहीं होती।”

इरफ़ान जामिया की मुख्य माँगें है कि अनुच्छेद 341/3 को हटाकर मुस्लिम दलितों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। पसमांदा समाज के लिए आरक्षण में जाति आधारित हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।जातिगत जनगणना के आँकड़े सार्वजनिक किए जाएँ। किसी भी बहुजन या मुस्लिम सम्मेलन में पसमांदा समाज का स्वतंत्र प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

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