पुस्तकें हैं सच्चे साथी, ज्ञान और नैतिकता का भंडार
गोरौल: नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रूसूलपुर कोरीगांव में पुस्तकालय हेतु किताबें एवं टीएलएम उपलब्ध कराई गई और बच्चों के बीच लेखन सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अरविंद कुमार शरण ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान का भंडार ही नहीं, बल्कि हमारे सच्चे मित्र भी हैं।
पुस्तकें पढ़ने की आदत डालें
राजकीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक उमेश कुमार प्रसाद सिंह ने कहा कि छात्र जीवन संघर्ष की एक अनूठी दास्तान होती है और इसके दौरान संघर्ष की सच्ची साथी होती है किताबें। हर छात्र को निश्चित रूप से किताबें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए।
पुस्तकें जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर मार्गदर्शन करती हैं
पुस्तकें सिर्फ प्रतियोगी जीवन की ही साथी नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर हमारा मार्गदर्शन करती हैं। छात्र जीवन विकासशील चरण होता है, उन्हें अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों द्वारा बतायी गई बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर उपस्थित रहे
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक जितेंद्र कुमार, राजीव रंजन के साथ विद्यालय के बच्चे लाडली, श्वेता, काजल, राज कुमार, धैर्य राज, हंसराज, मनीष सहित अन्य उपस्थित रहे।

