फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फ़रवरी से चलाए जाने वाले कार्यक्रम में जन भागीदारी जरूरी: डॉ विजय कुमार

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 फ़रवरी से चलाए जाने वाले कार्यक्रम में जन भागीदारी जरूरी: डॉ विजय कुमार

-अभियान के दौरान मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण
-करीब 45 लाख की आबादी होगी लाभान्वित

  • ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के सामने ही खानी होगी दवा

समस्तीपुर। 31 जनवरी
जिले में फाइलेरिया के प्रसार को कम करने के लिए 10 फरवरी से ट्रिपल ड्रग थेरेपी के तहत आइवर मेक्टिन, डीइसी तथा एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी, जिससे जिले के करीब 45 लाख लोग लाभान्वित होंगे। इस दवा को खिलाने के लिए लगभग 2138 टीम बनायी गयी है, जिसमें करीब 44 सौ ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर और करीब 250 सुपरवाइजर होगें। ये बातें जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने शनिवार को सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीएफएआर) तथा जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अभियान के दौरान तीन आई यू हसनपुर, मोहनपुर और पूसा में अभियान का संचालन नहीं होगा। यहां प्री टास चलेगा क्योंकि इस बार हुए एनबीएस में यहां माइक्रो फाइलेरिया रेट एक प्रतिशत से कम प्राप्त हुआ है। ज्ञात हो कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने 11 फ़रवरी को राज्य में एक करोड़ लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाने का संकल्प लिया है। जिले में इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मीडिया की महती भूमिका होगी। इस कार्यक्रम को मीडिया हर घर तक पहुंचाए। यह उनकी भी सामाजिक जिम्मेदारी है।
कार्यशाला के दौरान जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया कि 10 फ़रवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन अभियान के लिए दवा के शत प्रतिशत कवरेज के लिए विशेष रणनीति अपनायी जा रही है। हाल ही में हुए स्टेट टास्क फोर्स की बैठक में तय किया गया था कि 17 दिन तक चलने वाले इस अभियान के दौरान सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बूथ लगाकर दवा का सेवन कराया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में अधिक प्रयास करते हुए विशेष माइक्रो प्लान के अनुसार फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा। अभियान के दौरान मॉप-अप राउंड के दौरान छूटे हुए एवं इंकार किए हुए सभी लोगों को 7 वे और 14 वें दिन दवा का सेवन कराया जाएगा।

ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के सामने खानी है दवा:
डॉ विजय ने बताया कि सर्वजन दवा सेवन के तहत सबसे जरूरी है कि इस दवा को बांटना नहीं है बल्कि हरेक ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर को उसे अपने सामने ही खिलाना है। तीनों दवाओं में से एल्बेंडाजोल की गोली को हमेशा चबाकर खाना है।

प्रतिकूल प्रभाव पर घबराएं नहीं:
डीभीबीडीसीओ डॉ विजय कुमार ने बताया कि ट्रिपल ड्रग थेरेपी के सेवन से कुछ लोगों में प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिलते हैं, वह मतली, चक्कर, हल्की बुखार के रूप में भी हो सकते हैं। इन दुष्प्रभावों से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह दुष्प्रभाव तभी होगा जब आपके अंदर माइक्रोफाइलेरिया होंगे। प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए प्रखंडों में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। जिसमें चिकित्सक और एंबुलेंस हमेशा मौजूद होंगे। प्रत्येक ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के पास रैपिड रिस्पांस टीम का नंबर मौजूद होगा।

डोज पोल के तहत खानी है दवा:
कार्यशाला के दौरान पिरामल प्रोग्राम लीड, एनटीडी श्वेता कुमारी ने दवा खिलाने में इस्तेमाल किए जाने वाले डोज पोल के बारे में बताते हुए कहा कि दवा खिलाने के लिए एक डोज पोल का निर्माण किया गया है। इसमें लंबाई के अनुसार गोली की संख्या तय है। अगर किसी बच्चे की ऊंचाई 90 सेमी से कम और 5 साल से कम है तो उन्हें आइवरमेक्टिन की गोली नहीं देनी है। दो साल से पांच साल तक के बच्चों को सिर्फ डीइसी और एल्बेंडाजोल की गोली ही दी जाएगी।

किसे नहीं खानी है दवा:
डॉ विजय ने बताया कि यह दवा दो साल से कम उम्र के बच्चों, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और गर्भवती स्त्रियों को नहीं खिलानी है।

मौके पर भीबीडी कंसल्टेंट संतोष कुमार, भीबीडीएस पंकज कुमार, अजय कुमार, पीरामल की प्रोग्राम लीड श्वेता कुमारी, पिरामल के जयशंकर कुमार, सिफार के प्रतिनिधि अमित कुमार एवं श्रीकांत सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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