दो दशक की सेवा में सीतामढ़ी को परिवार कल्याण में देश-राज्य में बनाया नंबर वन, कैंसर मरीजों के लिए बने सहारा
सीतामढ़ी। 29 जून
बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट सेवा से एक अलग पहचान बनाने वाले डॉ. सुनील कुमार सिन्हा सीतामढ़ी अपनी लंबी और गौरवशाली सेवा के बाद 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वर्ष 2002 से लगातार स्वास्थ्य विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. सिन्हा ने कोरोना जैसे वैश्विक संकट से लेकर जिले में कैंसर उन्मूलन और परिवार कल्याण की दिशा में ऐसे ऐतिहासिक कार्य किए हैं, जिसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी है।
अपनी सेवानिवृत्ति पर डॉ. सुनील कुमार सिन्हा ने भावुक होते हुए कहा कि मैं बेहद सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन, मेरे कर्मियों और आम लोगों का भरपूर सहयोग मिला। सेवानिवृत्त होने के बाद भी मेरा हमेशा यही प्रयास रहेगा कि अपनी अंतिम सांस तक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहूँ।
मालूम हो कि अपने कार्यकाल के दौरान पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह द्वारा पटना में सम्मानित हुए। प्रमंडल स्तर पर आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह, तत्कालीन आरएडी डॉ सुरेन्द्र चौधरी, डॉ ज्ञान शंकर, डॉ सरिता शंकर द्वारा भी सम्मानित हो चुके हैं। इसके अलावा एनपी एनसीडी कार्यक्रम व कोविड में उत्कृष्ट कार्य के लिए विभिन्न समयों पर पदस्थापित जिलाधिकारी डॉ रंजीत सिंह,अभिलषा शर्मा, सुनील कुमार,मनेश कुमार मीणा एवं वर्तमान जिलाधिकारी रिची पांडेय द्वारा प्रशस्ति पत्र प्राप्त कर चुके हैं। तत्कालीन एसपी हरि किशोर सिंह, अनिल सिंह एवं मनोज तिवारी द्वारा भी सम्मानित हो चुके हैं।
सेवा के आखिरी महीनों में भी रचा इतिहास:
अपनी सेवानिवृत्ति के आखिरी महीनों में भी डॉ. सिन्हा की कार्यकुशलता और ऊर्जा में कोई कमी नहीं दिखी। चालू वर्ष 2026 में ही 26 जून तक कुल 138 कैंपों का आयोजन कर 1,495 सफल ऑपरेशन संपन्न कराए गए हैं। एक अद्भुत रिकॉर्ड के तहत, सीतामढ़ी जिले के कुल 17 प्रखंडों में से सिर्फ मेजरगंज और बोखड़ा को छोड़कर बाकी सभी 15 प्रखंडों में सदर अस्पताल सहित बड़े पैमाने पर ऑपरेशन कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर इलाकों तक पहुँचाया गया। डॉ. सिन्हा के इन उत्कृष्ट और सराहनीय कार्यों को देखते हुए जिले के वर्तमान जिला पदाधिकारी रिची पांडेय द्वारा भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। डॉ. सिन्हा को वर्तमान डीएम सर के हाथों दो वर्षों में ही तीन-चीन बार प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने का सौभाग्य मिला, जो उनकी प्रशासनिक और चिकित्सकीय दक्षता का प्रमाण है।
परिवार कल्याण में देश और राज्य में लहराया परचम:
डॉ. सिन्हा के कुशल प्रबंधन का ही नतीजा है कि जिला परिवार कल्याण और पुरुष नसबंदी कार्यक्रमों में लगातार शीर्ष पर बना रहा। जिला परिवार कल्याण ऑपरेशन के क्षेत्र में सीतामढ़ी ने लगातार तीन बार वर्ष 2023, 2024 और 2025 में पूरे बिहार में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर अपना परचम लहराया। वहीं मुजफ्फरपुर प्रमंडल में जिला वर्ष 2020 से 2025 के बीच कुल चार बार प्रथम स्थान पर रहा। इसके अलावा वर्ष 2019 में पुरुष नसबंदी के मामले में सीतामढ़ी ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर एक अभूतपूर्व मिसाल कायम की थी, जिसके लिए उन्हें तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य टीम द्वारा सराहा गया था।
कोरोना काल की चुनौतियां और ‘मुस्कान’ सर्टिफिकेशन
कोविड-19 महामारी के भीषण दौर में भी डॉ. सुनील कुमार सिन्हा ने आगे बढ़कर कमान संभाली थी। इनके गैर संचारी रोग पदाधिकारी के कार्यकाल के दौरान ही जिला को स्टेट द्वारा स्मोक फ्री जिला भी घोषित किया गया था। उनके कुशल नेतृत्व में कोविड अस्पताल की स्थापना की गई और बिना किसी अप्रिय घटना के सैकड़ों मरीजों का सफल इलाज सुनिश्चित कराया गया। उनके कार्यकाल में ही सीतामढ़ी के सदर अस्पताल को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार ‘मुस्कान’ सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ। इसके अलावा, सदर अस्पताल के इतिहास में पहली बार किसी गोली से ग्रसित मरीज का सफल ऑपरेशन कर शरीर से गोली निकालने का श्रेय भी डॉ. सिन्हा को ही जाता है।
कैंसर मरीजों के लिए बने सहारा, जांच से इलाज तक मजबूत हुई व्यवस्था
कैंसर मरीजों के लिए डॉ. सुनील कुमार सिन्हा सीतामढ़ी में एक मजबूत सहारे के रूप में उभरे। नवंबर 2022 से उनके नेतृत्व में जिले में कैंसर स्क्रीनिंग और उपचार की दिशा में विशेष अभियान शुरू किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक कैंसर जांच की पहुंच बढ़ी।
इस अभियान के तहत अब तक 73,953 लोगों की कैंसर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जांच के दौरान संदिग्ध मरीजों की पहचान कर समय पर उपचार की व्यवस्था की गई। अब तक कुल 183 मरीजों की बायोप्सी की गई, जिसमें 92 ओरल, 57 ब्रेस्ट और 34 सर्वाइकल कैंसर से संबंधित जांच शामिल हैं।
जांच प्रक्रिया के बाद कुल 218 कैंसर मरीजों की पुष्टि हुई, जिसमें 126 नए मरीज और 92 पहले से बीमारी से जूझ रहे मरीज शामिल हैं। इन मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थानों से जोड़ा गया।
कैंसर जागरूकता और जांच को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिले में अब तक 243 कैंप आयोजित किए गए। सदर अस्पताल में ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की बायोप्सी सुविधा शुरू की गई, जिससे मरीजों को जांच के लिए बाहर जाने की परेशानी कम हुई।
सीतामढ़ी में कैंसर उपचार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि तब जुड़ी, जब 6 जनवरी 2026 को पहली बार कीमोथेरेपी सेवा शुरू की गई। अब तक 2 मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। इससे जिले के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज की नई सुविधा मिलने लगी है।
बाढ़ की विभीषिका में अटूट सेवा भाव और रक्तदान
डॉ. सिन्हा का सेवाभाव केवल अस्पताल के कमरों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2002-2007 के बीच रून्नी सैदपुर कार्यकाल के दौरान आई भीषण बाढ़ में, जब पूरा अस्पताल परिसर घुटनों तक पानी में डूबा हुआ था, उन्होंने अपने आवास में 53 लोगों के आवासन की सुविधा उपलब्ध कराई साथ ही विपरीत परिस्थितियों में मरीजों का सफल उपचार भी किया। सामाजिक स्तर पर उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अब तक 37 बार खुद रक्तदान किया है और समाज के कमजोर वर्गों को हमेशा मुफ्त चिकित्सा सहायता प्रदान की है।
