पूर्णिया-मिथिला की धरती शर्मसार: इरफान जामियावाला ने उठाई इंसाफ की आवाज़
बिहार की पावन धरती—पूर्णिया और मिथिला—जहाँ सदियों से संस्कार, सम्मान और संस्कृति की गूंज रही है, आज एक जघन्य घटना के कारण आहत और शर्मसार और शर्मसार है। ऐसे समय में बिहार के प्रसिद्ध समाजसेवक और इंसाफ़ के लिए निरंतर आवाज़ उठाने वाले इरफान जामियावाला ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।
इरफान जामियावाला ने कहा कि यह देश सकीना, सीता, शकुंतला और सावित्री की मर्यादा का देश है। यहाँ नारी सम्मान केवल शब्द नहीं, बल्कि सभ्यता की नींव है। यदि कोई हमारी माँ–बहनों की इज़्ज़त को तार–तार करता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत कठोरतम सज़ा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए और भविष्य में कोई भी ऐसा अपराध करने से पहले सौ बार सोचे।
उन्होंने पूर्णिया–मिथिला की घटना में शामिल मो. जुनैद और उसके साथियों के विरुद्ध निष्पक्ष, तेज़ और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि न्याय में देरी भी अन्याय है। पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिलना चाहिए—यही एक सभ्य समाज की कसौटी है।
इरफान जामियावाला ने स्पष्ट किया कि यह मांग कानून के दायरे में रहकर है—ताकि दोष सिद्ध होने पर अदालत द्वारा ऐसी सज़ा दी जाए जो समाज के लिए इबरत बने और पीड़ितों के घावों पर मरहम रखे। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर पीड़ित के पक्ष में एकजुट हों। आज यह सिर्फ़ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की परीक्षा है। इंसाफ़ की इस लड़ाई में आवाज़ उठाना ही सच्ची इंसानियत है—और इरफान जामियावाला की यह आवाज़ उसी इंसानियत की गवाही देती है।

