वक्फ़ बोर्ड पर मुखर आवाज़ इरफान जामियावाला का बड़ा कदम: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ चुनाव प्रचार में दिखे
भारत के पसमांदा मुसलमानों के कद्दावर नेता, वक्फ़ बोर्ड में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार आवाज़ बुलंद करने वाले, जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जुड़े चर्चित सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तित्व इरफान अली जामियावाला हाल ही में महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महा युति के प्रमुख नेता एवं उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे के साथ चुनावी प्रचार के दौरान दिखाई दिए।
इस संयुक्त प्रचार ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खासकर अल्पसंख्यक राजनीति, पसमांदा मुसलमानों के सवाल और वक्फ़ संपत्तियों के मुद्दे पर यह सहभागिता बेहद अहम मानी जा रही है।
चुनावी जनसभाओं और जनसंपर्क अभियानों के दौरान इरफान जामियावाला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “वक्फ़ की ज़मीन और संसाधन गरीब मुसलमानों की अमानत हैं। इन पर माफियाओं और चंद परिवारों का कब्ज़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज ज़रूरत है सिर्फ़ पहचान की राजनीति से आगे बढ़कर विकास, शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक न्याय की ठोस राजनीति की। उनके अनुसार, पसमांदा, दलित और वंचित तबके के मुसलमानों को मुख्यधारा में लाने के लिए सत्ता में बैठे लोगों से सीधे संवाद और दबाव दोनों ज़रूरी हैं।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस अवसर पर इरफान जामियावाला के सामाजिक संघर्ष और जमीनी जुड़ाव की सराहना करते हुए कहा कि “समाज के हर वर्ग, खासकर अल्पसंख्यक और पिछड़े तबकों के साथ न्याय करना हमारी प्राथमिकता है। इरफान जामियावाला जैसे लोग ज़मीनी सच्चाइयों को सामने रखते हैं, जिससे नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनावी साथ-साथ चलना केवल एक प्रचार कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज के भीतर वक्फ़ सुधार, पसमांदा विमर्श और सत्ता से संवाद की नई दिशा का संकेत है।

