कोई भी प्रशिक्षण शिक्षकों को एक नई सीख प्रदान करती है: देवेश कुमार

कोई भी प्रशिक्षण शिक्षकों को एक नई सीख प्रदान करती है: देवेश कुमार

वैशाली: विख्याता देवेश कुमार जी ने कहा कि कोई भी प्रशिक्षण शिक्षकों को एक नई सीख की तरफ़ ले जाता है और नयी तकनीक और शिक्षा विभाग के तरफ़ से बदलते अध्याय से भी परशिक्षू को अवगत कराया जाता है और परशिक्षू अवगत भी होते हैं । विख्याता डाक्टर अब्दुल गफ्फार जी ने कहा कि किसी भी विभाग में प्रशिक्षण एक नया अध्याय को खोज कर उस रिजल्ट निकलने के लिए होता है ताकि उस विषय में प्रशिक्षु परिपक्व हो सके। विख्यात ज्योति कुमारी ने कहा कि प्रशिक्षण कोई नया अध्याय को नहीं जोड़ता है बल्कि पढ़ाए जा रहे पुस्तक को कैसे पढ़ाया जाए कि उस का प्रतिफल छात्र एवं छात्राओं के नैतिक एवं दैनिक जीवन में दिखाई दे। विख्यात शमीम अहमद जी ने कहा कि प्रशिक्षण विभाग द्वारा बार बार इसलिए कराया जाता है कि अध्यापकों का भी अधिगम और मूर्त से अमूर्त और अधिगम के प्रति फल का ज्ञानात्मक प्रशिक्षण प्राप्त हो और यहां से जाकर छात्र एवं छात्राओं के जीवन को बुनियादी शिक्षा से प्रकाशित कर सकें । विख्याता संजीत कुमार जी ने कहा कि हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा गणराज्य देश है और साक्षरता दर काफी कम है और शिक्षा देने वाले आप सब शिक्षक है आप जितना गुणवत्ता शिक्षण देने में परिपक्व होंगे उतना ही गुणात्मक शिक्षा बच्चों में देंगे और राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मंशा को पुरा करने में चौथा स्तंभ मजबूत बनाएंगे इसलिए सरकार अरबों रुपए शिक्षक पर खर्च कर रही है आप सब 50 प्रतिशत प्रशिक्षण का सदपयोग कर दें पुरा विश्वास है कि साक्षरता दर में अवश्य वृद्धि होंगी। ज्ञात हो कि उपर्युक्त सभी बातें पांच दिवसीय आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण पोखड़ैरा मुजफ्फरपुर में विदाई के दिन विख्याताओं ने बारी बारी से शिक्षकों के सामने रखी इस प्रशिक्षण में लगभग 300 सौ महिला एवं पुरुष ने भाग लिया वहीं प्रशिक्षुओं ने शिक्षण संस्थान विधालय के प्राचार्य श्री हरीशंकर यादव जी का और प्रभारी संजय कुमार जी का सही खान-पान और सही बेड बिस्तर और सही साफ सफाई परशिक्षूओं के लिए रखने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं और और क्षमा के साथ धन्यवाद दिया जहां विख्याताओं ने भी छोटी मोटी त्रुटि के लिए क्षमा चाहते हुए प्रशिक्षण का सदपयोग छात्र एवं छात्राओं पर करने के लिए आग्रह की। इस प्रशिक्षण में वरीय शिक्षक सेराजुल हक़ फैजी और नसीम अख्तर, तसबीहुज जमां, संजय सिंह, अनिता सिंह, शमा परवीन, जाहिदा नगमा, एजाज आदिल शाहपुरी (नेताजी), मिथलेश कुमार, मुकेश रजक, इरशाद आलम, मोहम्मद शाकिर, अकरम अली, आस मोहम्मद, प्रकाश रजक, ऊषा कुमारी, रुपाली मैडम, शाहीना अख्तरी, रबबाना, रुबीना अंजुम, गौरीशंकर, प्रभा कुमारी, अस्मिता कुमारी, तबस्सुम खातून, रौशन खातून पातेपुर, पम्मी कुमारी, सरीता कुमारी समेत ३०० प्रशिक्षु उपस्थित थे।

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