भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: भारतीय किसानों की स्थिति ‘आसमान से गिरे खजूर में अटके’ वाली होने जा रही है
ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध किया है, जिसे 3 फरवरी, 2026 को अंतिम रूप दिया गया है। संगठन का कहना है कि यह समझौता भारतीय किसानों के लिए हानिकारक है और आम जनता के हितों के खिलाफ है।
समझौते के मुख्य बिंदु:
- भारत रूस से तेल का आयात बंद कर देगा और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।
- अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाएगा।
- भारत अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर कोई टैरिफ नहीं लगाएगा।
- भारत ने मक्का और आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन सहित अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक पहुंच प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- डेयरी क्षेत्र को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए खोला जा रहा है, जिससे भारतीय डेयरी किसानों को प्रति वर्ष 1.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
एआईकेकेएमएस ने कहा कि यह समझौता आम किसानों के हितों के लिए हानिकारक है और इसके खिलाफ संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं है। संगठन ने सभी संघर्षरत लोगों, विशेषकर किसानों से आह्वान किया है कि वे इस घृणित समझौते का पूरी शक्ति और ऊर्जा से विरोध करने के लिए आगे आएं।

