मनरेगा कानून को बचाने के लिए पदयात्रा

मनरेगा कानून को बचाने के लिए पदयात्रा

झांसी की रानी से लेकर मनरेगा पदयात्रा कोर्ट रोड से चलकर अंबेडकर मूर्ति तक पहुंची। गजराज सिंह पूर्व विधायक भी पदयात्रा में शामिल रहे और फूल मालाओं द्वारा स्वागत किया गया। सतीश सहरावत पीएससी ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के द्वारा जो मनरेगा कानून लाया गया था, भारत की मौजूदा सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर श्री राम जी करना चाहते हैं, उसके विरोध में प्रदर्शन यात्रा निरंतर चलती रही।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा निर्देश पर गजराज सिंह पूर्व विधायक, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कांग्रेस सेवा दल, जिला अध्यक्ष नौशाद अल्वी, श्रीमती अफसाना अंसारी प्रदेश उपाध्यक्ष सेवादल और सैकड़ो व्यक्तियों ने भाग लिया। गैर राजनीतिक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मुस्लिम कल्याण संगठन के डॉक्टर रईस अहमद तुर्क वंशज ने भी भाग लिया।

क्या है मनरेगा?

मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) एक भारतीय कानून है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार की गारंटी प्रदान करता है। इस कानून के तहत, हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार दिया जाता है, जिससे उन्हें अपनी आजीविका चलाने में मदद मिलती है।

मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी को कम करना, रोजगार के अवसर प्रदान करना, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस कानून के तहत, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, जल संरक्षण, और अन्य विकास कार्यों के लिए रोजगार प्रदान करती है।

क्यों हो रहा है विरोध?

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के नाम को बदलकर श्री राम जी करने के प्रस्ताव के विरोध में यह पदयात्रा निकाली गई है। विरोध करने वालों का कहना है कि यह प्रस्ताव मनरेगा के मूल उद्देश्य को बदलने का प्रयास है, और यह ग्रामीण गरीबों के हितों के खिलाफ है।

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