आग लगने से जलकर सारा संपत्ति हुआ खाक
महुआ। रेणु सिंह
महुआ थाना के लगुरांव बिलन्दपुर पंचायत के लगुरांव वार्ड संख्या 04 मैं आग लगने से एक परिवार का सारा संपत्ति जलकर खाक हो गया। कुछ भी नहीं बचा। अब वह खुले आकाश के नीचे रहने को विवस है।
जानकारी के अनुसार उक्त गांव के उक्त वार्ड संख्या निवासी दिल्ली में गार्ड के काम कर रहे दीपा महतो की पत्नी महादेवी घर बंद कर अपनी बहन के यहां चली गई थी। इस बीच उसे घर में आग लगे की सूचना बगलगीर द्वारा दी गई। बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई लेकिन जब तक उसकी दो गाड़ियां पहुंची तब तक घर का पूरा सामान जलकर खाक था। हालांकि जले सामान और विखरे राख पर फायर ब्रिगेड की टीम ने पानी छिड़ककर अपना काम पूरा कर लिया।
20 लाख से अधिक के गहने और एक लाख नगदी भी जली:
दीपा महतो के बंद घर में आग लग जाने से उनके दो पुत्री पन्ना देवी और ज्ञानी देवी के सारे गहने, कपड़े, बक्सा, पेटी, बर्तन, नाती अविनाश और अभिषेक के तिलक और शादी में मिले सारा सामान जलकर समाप्त हो गया। वही महाजन को देने के लिए रखें 1,07,500 लाख रुपया भी जलकर खाक हो गया। घर में पेटी, बक्सा, कपड़े, बिछावन, अनाज, खाने की वस्तु, खाट, चौकी, चूल्हा-चौका कुछ भी नहीं बचा। यहां तक की प्यास बुझाने के लिए भी आफत बन गई है। दूसरे के यहां से पानी लाकर पी रहे हैं। यह घटना की सूचना दिल्ली में गार्ड के काम कर रहे दीपा महतो को भी मिली तो वे वहां से भागे भागे घर पहुंचे। ग्रामीण सह पूर्व मुखिया सूरज महतो, लक्ष्मी महतो, झूणा महतो ने बताया कि आग ऐसी भयावह थी कि कुछ भी नहीं बच पाया। इधर सूचना देने के बावजूद प्रखंड सह अंचल प्रशासन पीड़ित परिवार को कुछ सहायता नहीं कर पाया है। सिर्फ एक प्लास्टिक देकर अपना काम पूरा कर लिया है।
40 वर्ष पूर्व घर में आग लगने से पीड़ित के दो बच्चे कि जिंदा जलकर हो गई थी मौत:
लगुरांव के पीड़ित दीपा महतो के घर में 40 वर्ष पूर्व भी भीषण आग लगी थी। जिसमें घर के सारे सामान के साथ एक पुत्र 05 वर्षीय छोटू और एक पुत्री 02 वर्षीया लक्ष्मी की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। इतनी बड़ी घटना का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था कि यह दूसरी घटना हो गई। दीपा महतो उक्त घटना में बचे अपने दो पुत्रियों को सब कुछ मानकर जीवन वसर करना शुरू किया। जबकि फिर एक बार प्राकृतिक आपदा में उनका सब कुछ समाप्त हो गया। आग लगने के बाद दीपा महतो व उनकी पत्नी महादेवी खुले आकाश के नीचे दूसरे से खाट चौकी पर किसी तरह समय काटने को विवश हैं। पेट की भूख भी बगलगीर द्वारा मिले दो रोटियों से मिट रहा है अन्यथा भूखे समय काटना पड़ता है।
