लखनऊ भारत में पहली बार अरसिल और ऑटोबॉक ने बढ़ाया हौसला पैरा एथलीट क़ो मिला आधुनिक तकनीकी सहयोग

अरसिल और ऑटोबॉक ने बढ़ाया हौसला, पैरा एथलीट्स को मिला आधुनिक तकनीकी सहयोग. लखनऊ: भारत की पहली परिसंपत्ति पुनर्निर्माण संस्था अरसिल और जर्मनी की अग्रणी कृत्रिम अंग निर्माता संस्था ऑटोबॉक ने गोमतीनगर स्थित ऑटोबॉक केंद्र में एक विशेष सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम का आयोजन किया। “विजेताओं का सशक्तिकरण – गतिशीलता बहाल करना, उत्कृष्टता को प्रेरित करना” विषय के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य देश के पैरा खिलाड़ियों को उन्नत सहायक उपकरणों के माध्यम से सशक्त बनाना और उनकी खेल क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। खिलाड़ियों को मिला उन्नत तकनीकी सहयोग कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा खिलाड़ियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उन्हें अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए गए, जिससे उनकी गतिशीलता, संतुलन और प्रदर्शन क्षमता में सुधार होगा:
पैरा बैडमिंटन: मनदीप कौर: अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी (30 से अधिक पदक, पेरिस पैरालंपिक 2024 में 5वां स्थान) को उन्न घुटना-टखना-पैर सहायक उपकरण दिया गया।
संजना कुमारी: एशियाई युवा पैरा खेल स्वर्ण पदक विजेता को विशेष घुटना-टखना-पैर सहायक उपकरण प्रदान किया गया। शशांक कुमार: खेलो इंडिया स्वर्ण पदक विजेता को खेल व्हीलचेयर दी गई। पैरा निशानेबाजी: सुमेधा पाठक: विश्व कीर्तिमान धारक को सक्रिय हल्की व्हीलचेयर प्रदान की गई।
हिमांशु सिंह: राष्ट्रीय वायु राइफल निशानेबाज को उन्नत कृत्रिम अंग सहयोग दिया गया। पैरा टेबल टेनिस:
हर्षवर्धन दीक्षित: अखिल भारतीय स्वर्ण पदक विजेता को खेल व्हीलचेयर मिली। राजू पांचाल: राज्य स्तरीय पदक विजेता को उन्नत कृत्रिम अंग सहयोग प्रदान किया गया। विशेष योगदान: गौरव खन्ना
इस अवसर पर भारतीय पैरा बैडमिंटन के सबसे सम्मानित और सफल प्रशिक्षकों में से एक, गौरव खन्ना की भूमिका की भी सराहना की गई। उन्होंने भारत में पैरा बैडमिंटन को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे लगातार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित रहे हैं। नेतृत्व और विशेषज्ञ दल इस अवसर पर अरसिल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री फनिन्द्रनाथ काकरला के मार्गदर्शन में संस्थान ने खिलाड़ियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में ऑटोबॉक की ओर से श्रीमती शिखा शुक्ला (निदेशक मुख्य खाते) और डॉ. गौरव रुइया (केंद्र प्रबंधक, उत्तर प्रदेश क्षेत्र एवं वरिष्ठ कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण विशेषज्ञ) मौजूद रहे। तकनीकी सहायता और उपकरणों के समायोजन में विशेषज्ञों के दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें डॉ. कर्णेश कर्ण मिश्रा, डॉ. सोमेन्द्र सिंह, डॉ ऋचा मिश्रा, सिद्धार्थ सिंह, डॉक्टर स्वर्णिमा सिंह और अभिषेक शर्मा (सभी कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण विशेषज्ञ) शामिल थे। संस्थाओं के बारे में अरसिल: यह भारत की पहली और अग्रणी परिसंपत्ति पुनर्निर्माण संस्था है, जो बैंकिंग क्षेत्र की गैर-निष्पादित संपत्तियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। ऑटोबॉक: यह जर्मनी की एक विश्व प्रसिद्ध संस्था है जो कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और गतिशीलता समाधानों में वैश्विक अग्रणी है। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इनका केंद्र आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए जाना जाता है। भविष्य की दिशा यह पहल खिलाड़ियों को आगामी एशियाई पैरा खेल, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता करेगी। अरसिल और ऑटोबॉक का यह साझा प्रयास दर्शाता है कि सही तकनीक और समर्थन के साथ पैरा खिलाड़ी वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं। तहलका न्यूज़ के लिए मिट्ठू शाह की रिपोर्ट

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