बिहार की राजनीति में नव वर्ष के अवसर पर एक अहम पहल सामने आई है।
कद्दावर समाजसेवक और वक्फ बोर्ड की जेपीसी मीटिंग में पसमांदा मुसलमानों की आवाज़ उठाने वाले इरफान जामियावाला ने
बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से पसमांदा आयोग के गठन की मांग की।
यह मांग उन्होंने नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ सामाजिक न्याय के संदेश के रूप में रखी।
इरफान जामियावाला ने कहा कि पसमांदा मुसलमान दशकों से हाशिये पर हैं।
शिक्षा, रोज़गार और प्रतिनिधित्व में उन्हें संरचनात्मक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
बिहार पसमांदा विज़न को साकार करने के लिए संस्थागत पहल अनिवार्य है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पसमांदा आयोग केवल राजनीतिक घोषणा नहीं होना चाहिए।
इसके लिए सामाजिक चेतना और व्यापक जनसमर्थन की आवश्यकता है।
जामियावाला के अनुसार यह पहल एक ऐतिहासिक अवसर है।
उनकी पहल से यह आंदोलन एक मांग भर नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का संकेत बन रहा है।
पसमांदा समुदाय के विभिन्न संगठनों ने इस मांग का समर्थन किया है।
राजनीतिक हलकों में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा तेज़ हो गई है।
यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर अमल करते हैं,
तो यह बिहार में पसमांदा मुसलमानों के लिए नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।

