महुआ में गया जी के तर्ज पर बन रहा तिलकुट
इस समय तिलकुट बनाने में दर्जनों मजदूरों को मिला है काम, महुआ में गया जी के तर्ज पर बन रहे तिलकुट की काफी मांग
महुआ। रेणु सिंह
गया जी के तर्ज पर अब महुआ में भी तिलकुट निर्माण हो रहा है। यहां अरवल जिला से आए दर्जनों कारीगरों द्वारा तिलकुट का निर्माण किया जा रहा है। जिसकी मांग अधिक है। वहीं इस मौसम तिलकुट बनाने वाले कारीगरों को काम भी मिला है।
सोमवार को यहां निर्माण कर्ताओं द्वारा बताया गया कि गया जी के तर्ज पर एक से बढ़कर एक तिलकुट का बनाया जा रहा है। जिसके कारण यहां की तिलकुट की मांग दूसरे जगह भी काफी बढ़ गई है। महुआ में कई जगहों पर अरवल से आए कारीगरों द्वारा विभिन्न प्रकार की तिलकुट बनाया जा रहा है।
कड़ाके की ठंड और कनकनी में कारीगरों को मिला है काम:
इस प्रतिकूल मौसम में कारीगरों को काम मिला है। यहां पर अरवल से आए कारीगरों ने बताया कि वे लोग एक महीने से महुआ में रहकर तिलकुट का निर्माण कर रहे हैं। इस काम में उन्हें यहां मन भी लगता है और अच्छी मजदूरी भी मिल जा रही है। जिससे घर परिवार चलता है। उनके द्वारा बनाए गए तिलकुट की मांग अधिक है। जिसके कारण महुआ से थोक में इसकी बिक्री हो रही है। बाहर से खरीदार पहुंचकर यहां थोक में तिलकुट खरीद कर बिक्री के लिए ले जा रहे हैं। उनके द्वारा बताया गया कि यहां पर हर प्रकार के तिलकुट बनाया जा रहा है।
शुगर फ्री भी बन रहातिलकुट
शुगर फ्री से लेकर गुड़ और चीनी की अलग-अलग तिलकुट बनता है। इस वक्त मकर संक्रांति को लेकर गुड़ के बनी तिलकुट की मांग अधिक है। लोग सगे संबंधियों के यहां सौगात में मिठाई की जगह तिलकुट ही भेज रहे हैं। इस वक्त मौसम के कारण बच्चे भी तिलकुट की मांग करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि काले तिल की कमी के कारण उजला तिल का तिलकुट अधिक बनाया जा रहा है। कीमत अधिक होने के बावजूद लोग खोवादार तिलकुट की भी मांग कर रहे हैं। बताया गया कि एक समय था जब गया जी की तिलकुट का अलग महत्व था। अब गयाजी के तर्ज पर महुआ में भी तिलकुट निर्माण कर अच्छा व्यवसाय किया जा रहा है।

