इंटर/मैट्रिक परीक्षा में 15 मिनट तक देर आने वाले छात्रों को प्रवेश दी जाए : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन , बिहार। रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
हाजीपुर (वैशाली)
इंटर/मैट्रिक परीक्षा को लेकर छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन ,बिहार ने परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त असमानता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है । संगठन ने कहा कि एक ओर कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक एवं पदाधिकारी आधा से एक घंटा विलंब से उपस्थित होकर भी हाजिरी दर्ज कर लेते हैं, जबकि दूसरी ओर छात्र छात्राएं यदि मात्र 5 मिनट विलंब से परीक्षा केंद्र पर पहुंचते हैं, तो उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है, जिससे उनका पूरा एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो जाता है। यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन है। ट्रैफिक जाम, परिवहन बाधा एवं अन्य प्रशासनिक कारणों से होने वाली देरी का दंड छात्रों को देना पूर्णतः अन्यायपूर्ण है ।अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि इंटर परीक्षा सह आगामी मैट्रिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा प्रारंभ समय के बाद न्यूनतम 15 मिनट का ग्रेस टाइम छात्र छात्राओं को प्रवेश हेतु अनिवार्य रूप से दिया जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य कुछ मिनटों की देरी के कारण नष्ट न हो । संगठन ने यह भी मांग की कि शिक्षकों एवं पदाधिकारियों के लिए कठोर समयपालन नियम लागू किए जाएं तथा विलंब से आने पर डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति के माध्यम से जवाबदेही तय की जाए, जिससे नियम-कानून सभी पर समान रूप से लागू हों इस संबंध में संगठन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत कुमार यादव ने कहा कि छात्रहित और मानवाधिकार से जुड़े मामलों में यदि आवाज नहीं सुनी जाती है, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के लिए बाध्य होगा ।
