एम्स पटना नेत्र बैंक बना नेत्रहीन मरीजों के लिए वरदान

एम्स पटना नेत्र बैंक बना नेत्रहीन मरीजों के लिए वरदान
फुलवारी शरीफ परवेज आलम
AIIMS Patna के नेत्र बैंक ने नेत्रहीन मरीजों के जीवन में नई रोशनी लाकर एक मिसाल कायम की है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत SOTTO (State Organ and Tissue Transplant Organisation) से विधिवत अनुमति प्राप्त होने के पश्चात नेत्र बैंक ने 30 अप्रैल 2025 से कार्य प्रारम्भ किया। स्थापना के बाद से अब तक कुल 64 नेत्रदान प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 45 सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं।
इन प्रत्यारोपणों के माध्यम से जन्म से अंधापन, कॉर्निया में सूजन (फूलापन), कॉर्नियल अल्सर, जन्मजात अनुवांशिक रोग, चोट के कारण कॉर्निया का सफेद होना तथा मोतियाबिंद सर्जरी के बाद उत्पन्न जटिलताओं जैसे मामलों में मरीजों को दृष्टि प्रदान की गई है।
वर्तमान में 50 से अधिक मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण हेतु प्रतीक्षा सूची में हैं। प्रतीक्षा सूची में 10 मरीज दोनों आँखों से नेत्रहीन है, प्रतीक्षा सूची में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, नेत्र बैंक निरंतर नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक नेत्रहीनो को कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए प्रयासरत है।
नेत्र बैंक की सफलता की तीन प्रेरणादायक कहानियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं

  1. जन्म से नेत्रहीन को पहली रोशनी
    पटना, बिहार के साहपुर गाँव के 21 वर्षीय बबलू जन्मजात कॉर्नियल अपारदर्शिता के कारण बचपन से अंधत्व का जीवन जी रहे थे। युवक ने कभी इस दुनिया को अपनी आँखों से नहीं देखा था। अनेक परामर्शों के बाद जब वह एम्स पटना पहुँचा, तो विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत जाँच के बाद कॉर्निया प्रत्यारोपण का निर्णय लिया।
    सफल सर्जरी के बाद जब पहली बार उसने अपनी माँ का चेहरा देखा, तो उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर मुस्कान थी। यह केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि जीवन का पुनर्जन्म था।
  2. कॉर्निया प्रत्यारोपण से नई रोशनी
    अंजुम परवीन की ज़िंदगी वर्ष 2017 में अचानक बदल गई। दाहिनी आँख में चोट लगने के बाद उनकी आँख की कॉर्निया सफेद हो गई और उनकी दृष्टि लगभग समाप्त हो गई। उसी वर्ष कोलकाता में उनका पहला कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश वह सफल नहीं हो सका।
    आशा के साथ वर्ष 2021 में दोबारा कोलकाता में ही कॉर्निया प्रत्यारोपण कराया गया, परंतु कुछ समय बाद फिर से कॉर्निया सफेद हो गई। लगातार असफलताओं ने उन्हें और उनके परिवार को गहरे निराशा में डाल दिया। इलाज का खर्च और मानसिक पीड़ा दोनों ही उनके लिए बड़ी चुनौती बन गए। धीरे-धीरे उनकी दुनिया अंधेरे में डूबती जा रही थी।
    वर्ष 2022 में उन्होंने AIIMS Patna में पंजीकरण कराया। यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्थिति का विस्तार से मूल्यांकन किया और उचित समय का इंतजार करते हुए नेत्रदान से प्राप्त स्वस्थ कॉर्निया की व्यवस्था की।
    अंततः जनवरी 2026 में AIIMS Patna में उनका कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। इस बार सर्जरी सफल रही और आज उनकी आँख में प्रत्यारोपित कॉर्निया स्वस्थ है।
  3. असफल उपचारों के बाद मिली सफलता
    जिला अरवल के निवासी उपेंद्र चौधरी बचपन से ही बायीं आंख की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। वर्ष 2022 में उन्हें जन्मजात सफेद कॉर्निया (Congenital Corneal Opacity) की समस्या का पता चला। दृष्टि लगभग न के बराबर थी, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित होता था।
    साल 2023 में उन्होंने हैदराबाद में कॉर्निया प्रत्यारोपण कराया। प्रारंभिक सुधार के बाद भी पूरी तरह संतोषजनक परिणाम नहीं मिल सके।
    आखिरकार, अक्टूबर 2025 में उन्होंने एम्स पटना के नेत्र विभाग में पुनः कॉर्निया प्रत्यारोपण करवाया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया यह ऑपरेशन सफल रहा।
    कुछ ही समय में उनकी दृष्टि में स्पष्ट सुधार दिखाई देने लगा। उसने कहा, “यहाँ मुझे सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि विश्वास भी मिला।”
    प्रोफेसर (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सीईओ, तथा प्रो. (डॉ.) अनुप कुमार
    ,मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट, ने प्रो. (डॉ.) अमित राज के नेतृत्व में पूरी नेत्र बैंक टीम को इस मानवीय एवं सराहनीय कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी।
    एम्स पटना नेत्र बैंक समाज से अपील करता है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएँ, ताकि अंधकार में डूबे अनेक जीवनों में प्रकाश फैलाया जा सके।

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