महिला की गरिमा और सत्ता की जवाबदेही
इरफान जामियावाला
बिहार के मुसलमानों का नेता, समाजसेवक और लेखक इरफान जामियावाला ने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते वह दृश्य देखना बेहद पीड़ादायक और आक्रोश पैदा करने वाला था। किसी महिला का नक़ाब इतनी लापरवाही से खींचा जाना और उस क्षण की बेपरवाह मुस्कान यह केवल एक हरकत नहीं, बल्कि एक महिला की आस्था, पहचान और सम्मान पर सीधा प्रहार है।
नक़ाब सिर्फ़ कपड़ा नहीं होता, वह एक महिला की मर्यादा और उसकी निजी पसंद का प्रतीक है। उसे बिना सहमति छूना या हटाना, उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा है। यह व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता—चाहे वह कोई आम व्यक्ति करे या सत्ता के शिखर पर बैठा हुआ व्यक्ति।
इरफान जामियावाला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता कभी भी सीमाओं का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देती। लोकतंत्र में ताक़त का अर्थ मनमानी नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी, संवेदनशीलता और संयम होता है। जब सत्ता असंवेदनशील दिखती है, तो समाज के कमज़ोर तबके खुद को और ज़्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल मुस्लिम समाज का नहीं है, बल्कि हर उस महिला का है जो सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना चाहती है। ऐसी घटनाएँ समाज में डर और अविश्वास पैदा करती हैं, जो किसी भी सभ्य लोकतंत्र के लिए घातक हैं।
इसीलिए नीतीश कुमार को इस घटना पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगनी चाहिए। माफ़ी माँगना कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक बड़े नेता की पहचान होती है। इससे यह संदेश जाएगा कि बिहार में सत्ता महिला की गरिमा के साथ खड़ी है, न कि उसके सम्मान को ठेस पहुँचाने वालों के साथ।
अंत में इरफान जामियावाला ने कहा
किसी भी लोकतंत्र में महिला की इज़्ज़त से बड़ा न कोई पद होता है, न कोई कुर्सी और न ही कोई सत्ता।
आपका अपना
इरफान जामियावाला
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