कालाजार उन्मूलन की तैयारियों को परखने सीतामढ़ी पहुंचीं डब्लूएचओ की नेशनल को-ऑर्डिनेटर

कालाजार उन्मूलन की तैयारियों को परखने सीतामढ़ी पहुंचीं डब्लूएचओ की नेशनल को-ऑर्डिनेटर

-डोजियर की प्रगति का लिया जायजा, सिविल सर्जन, डीभीबीडीसीओ और डब्लूएचओ टीम ने सदर अस्पताल व सुरसंड सीएचसी का किया निरीक्षण

-कालाजार मुक्त सीतामढ़ी: जमीनी स्तर पर सतत निगरानी और सटीक आंकड़ों पर जोर

​​सीतामढ़ी। 19 दिसंबर
जिला स्वास्थ्य विभाग ने कालाजार उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वैश्विक मानकों पर काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की नेशनल को-ऑर्डिनेटर (कालाजार) डॉ. पल्लिका सिंह ने जिले का दौरा कर डोजियर की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

​विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण:
डॉ. पल्लिका सिंह ने जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज (भीबीडी) नियंत्रण कार्यालय, सदर अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सुरसंड का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने कालाजार उन्मूलन से जुड़े अभिलेखों, सर्विलांस डेटा, केस मैनेजमेंट, आईईसी/बीसीसी कार्य और रिपोर्टिंग प्रणाली को देखा। टीम ने विशेष रूप से साक्ष्यों के संकलन और डेटा की पूर्णता पर जोर दिया ताकि उन्मूलन का दावा मजबूती से पेश किया जा सके।
डब्ल्यूएचओ की नेशनल कोऑर्डिनेटर डॉ. पल्लिका सिंह ने बताया कि कालाजार डोज़ियर एक विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार और डब्ल्यूएचओ यह निर्णय लेते हैं कि संबंधित जिला कालाजार उन्मूलन के सभी मानकों को पूरा करता है या नहीं। डोज़ियर में न केवल उपलब्धियां दर्ज होती हैं, बल्कि अभियान के दौरान आई चुनौतियों और उनके समाधान का भी उल्लेख किया जाता है, ताकि भविष्य में रोकथाम की रणनीतियों को और मजबूत किया जा सके।

क्यों जरूरी है कालाजार डोज़ियर प्रिपरेशन:
•उन्मूलन के दावे का वैज्ञानिक और प्रमाणिक आधार
•राष्ट्रीय एवं डब्लूएचओ टीम के समक्ष प्रखंडवार समीक्षा प्रस्तुत करना
•जिले में कालाजार नियंत्रण की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण
•भविष्य में बीमारी की रोकथाम के लिए ठोस रणनीति तैयार करना

​अधिकारियों के निर्देश:
निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार और जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर.के. यादव ने स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए फील्ड स्तर पर समयबद्ध उपचार और सटीक दस्तावेजीकरण अनिवार्य है। डब्लूएचओ टीम ने जिले के प्रयासों की सराहना करते हुए डोजियर को और बेहतर बनाने के लिए तकनीकी सुझाव भी साझा किए।

ज्ञात हो कि कालाजार एक वेक्टर (मच्छड़/मक्खी) जनित रोग है जो संक्रमित मादा बालू मक्खी के काटने से होती है। कालाजार का इलाज समय पर नहीं हो तो यह जानलेवा हो सकता है। सभी सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच एवं उपचार की सुविधा निःशुल्क है। कालाजार प्रभावित ग्रामों में (जहां पिछले 3 वर्षों में कोई मरीज प्रतिवेदित हो), वर्ष में दो बार कीटनाशक का छिड़काव (आईआरएस) कराया जाता है।

कालाजार के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय से बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, प्लीहा (स्प्लीन) एवं लीवर बढ़ जाना एवं जोड़ों का दर्द शामिल हैं। कालाजार मरीजों को इलाज के उपरांत मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना अंतर्गत 66 सौ रुपए एवं भारत सरकार से 500 रुपए सहित कुल 7100 रुपए दिए जाते हैं।

​इस मौके पर प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. अजीत कुमार, सुरसंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, डब्लूएचओ जोनल कॉर्डिनेटर डॉ. माधुरी देवराजू, पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, जिला लीड रोहित कुमार, प्रखंड प्रमुख चंदन कुमार, मुखिया पद्मराज भारद्वाज सहित भीडीसीओ प्रिंस व पवन और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी मौजूद रहे।

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