नवजातों के ‘नाज़ुक समय’ को सुरक्षित करेगी रेफरल प्रणाली -परिवहन के दौरान ही मिलेगी ‘प्री-हॉस्पिटल केयर’
हाजीपुर। वैशाली जिले के स्वास्थ्य ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाना है। स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसी व्यवस्था तैयार की है जो न केवल अस्पतालों के भीतर की चिकित्सा को बेहतर बनाएगी, बल्कि अस्पताल पहुँचने से पहले के ‘नाज़ुक समय’ को भी सुरक्षित करेगी।
जिले में अब स्वास्थ्य सेवाओं को केवल इलाज तक सीमित न रखकर, उसे त्वरित रिस्पांस और तकनीकी निगरानी से जोड़ा जा रहा है, ताकि वैशाली के किसी भी कोने में जन्मा शिशु संसाधनों के अभाव में दम न तोड़े।
तकनीक और तत्परता का नया संगम
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ कुमार मनोज ने बताया कि नई कार्य योजना के सबसे महत्वपूर्ण पहलू के रूप में एक डिजिटल नेटवर्क को विकसित किया गया है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला मुख्यालय के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को नई गति देगा।
परिवहन के दौरान सुरक्षा का सुरक्षा कवच
सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू को मॉनिटर कर रहीं डॉ शाइस्ता कहती हैं कि रेफरल प्रणाली की सबसे बड़ी कमज़ोरी एम्बुलेंस के भीतर विशेषज्ञ देखभाल की कमी रही है। इस समस्या के समाधान हेतु विभाग ने परिवहन के दौरान ही ‘प्री-हॉस्पिटल केयर’ प्रदान करने की योजना बनाई है।
सामुदायिक निगरानी और भविष्य की राह
जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निभा रानी सिन्हा बताती हैं कि अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।
वैशाली जिला स्वास्थ्य समिति का यह एकीकृत मॉडल न केवल चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि करेगा, बल्कि यह समाज में एक ऐसा विश्वास पैदा करेगा जहाँ हर नवजात का जीवन सुरक्षित हाथों में होगा।

